Jaisalmer to Jodhpur AC Bus में भीषण आग – 20 passengers seriously injured | सफर में सुरक्षा पर फिर सवाल
जैसलमेर से जोधपुर जा रही AC बस में अचानक लगी आग – 20 यात्री झुलसे, सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
राजस्थान में एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक AC बस में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया, जिसमें लगभग 20 से अधिक यात्री झुलसकर घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस में शुरुआती कुछ मिनटों तक धुआं उठा और देखते ही देखते आग की लपटों ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया।
कैसे हुआ हादसा? यह AC बस सुबह के समय जैसलमेर से जोधपुर के लिए रवाना हुई थी। यात्रियों के अनुसार, चलते समय अचानक पीछे के हिस्से से धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में ड्राइवर ने इसे सामान्य तकनीकी दिक्कत समझा, लेकिन कुछ ही क्षणों में आग तेजी से फैलने लगी। बस में ऑटोमेटिक फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं था, जिसके कारण आग को तुरंत नियंत्रित नहीं किया जा सका।
लोग घबराकर खिड़कियों और दरवाजे की तरफ भागे, लेकिन AC बस होने की वजह से खिड़कियां सील्ड थीं और इससे स्थिति और भी भयावह हो गई। कई यात्रियों को खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलना पड़ा।
स्थानीय लोगों ने बचाई जान हादसे के दौरान आस-पास के गांवों से लोग मौके पर पहुंच गए। उन्होंने डंडों और लोहे की रॉड से खिड़कियां तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला। यह स्थानीय लोगों की सूझबूझ ही थी जिसने कई जानें बचा लीं। राहत एवं बचाव दल के पहुंचने में समय लगा, लेकिन ग्रामीणों ने स्थिति को संभालते हुए घायलों को निजी वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रॉली तक में बैठाकर अस्पताल पहुंचाया।
20 यात्री झुलसे, कई की हालत गंभीर प्राथमिक सूचना के अनुसार कम से कम 20 यात्री झुलस गए हैं, जिनमें से 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को जोधपुर के बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि कई यात्रियों के चेहरे और हाथों पर गंभीर जलन है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल इस तरह की घटनाएं यह बताती हैं कि सड़क मार्ग से सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा अभी भी लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। हादसे के बाद यात्रियों ने बताया कि बस में न तो फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद थे और न ही इमरजेंसी एक्जिट को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई थी।
सवाल उठते हैं –
क्या AC बसों की नियमित जांच होती है?
फायर सेफ्टी सिस्टम क्यों नहीं लगाया जाता?
क्या ड्राइवर और कंडक्टर को आपातकालीन स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाता है?
बस ऑपरेटरों की लापरवाही या सिस्टम की कमजोरी?
अक्सर प्राइवेट बस संचालक लाभ कमाने के चक्कर में सर्विसिंग और सुरक्षा उपकरणों पर खर्च करने से बचते हैं। कई AC बसें सिर्फ बाहरी चमक-दमक के साथ चलती हैं, लेकिन उनकी तकनीकी जांच नहीं होती। यात्रा के दौरान यात्रियों को सिर्फ आराम नहीं, बल्कि सुरक्षा का भरोसा भी चाहिए। दुर्भाग्य से, यह भरोसा लगातार टूटता जा रहा है।
सरकार को उठाने होंगे ठोस कदम ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार और परिवहन विभाग को अब औपचारिक जांच के बजाय कड़ी कार्रवाई और नियमों का सख्त पालन कराना होगा। बसों में फायर अलार्म सिस्टम, इमरजेंसी हैमर, आग बुझाने वाले सिलेंडर और सख्त फिटनेस जांच को अनिवार्य करना होगा।
यात्रियों को भी होना होगा सजग सिर्फ सिस्टम पर निर्भर रहने से बात नहीं बनेगी। यात्रियों को भी सफर शुरू करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातें जांचनी चाहिए:
क्या बस में फायर सेफ्टी उपकरण लगे हैं? इमरजेंसी एक्जिट कहां है?क्या स्टाफ को सुरक्षा के नियम पता हैं?
यदि कोई कमी दिखे तो तुरंत सोशल मीडिया, हेल्पलाइन या शिकायत पोर्टल पर जानकारी देनी चाहिए।
अंत में – एक चेतावनी
जैसलमेर-जोधपुर बस हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर समय पर कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी घटनाएं किसी भी यात्री के जीवन को खतरे में डाल सकती हैं। सरकार, बस संचालक और आम यात्री – सभी को मिलकर सड़क सुरक्षा को मुहिम बनाना होगा।
में मची चीख-पुकार, मोबाइल पर आते रहे कॉल
हादसे के बाद जो दृश्य सामने आए, वे दिल दहला देने वाले थे। कई यात्रियों के फोन लगातार बज रहे थे, लेकिन वे दर्द से कराहते हुए कॉल तक नहीं उठा पा रहे थे। परिजनों ने जब सोशल मीडिया पर आग लगी बस की तस्वीरें देखीं तो अस्पतालों में अफरा-तफरी मच गई। कई परिवार तो सीधे रोडवेज डिपो पहुंच गए और जानकारी जुटाने लगे।
प्रत्यक्षदर्शी बोले – “अगर 5 मिनट और देर होती तो कोई नहीं बचता”
वहीं मौके पर मौजूद एक ग्रामीण ने बताया,
“हम खेत में काम कर रहे थे, तभी रोड की तरफ से जोर का धमाका सुनाई दिया। जब दौड़कर पहुंचे तो देखा कि बस आग बन चुकी थी। अगर हम लोग तुरंत खिड़कियां नहीं तोड़ते तो शायद किसी को भी बचाना संभव नहीं होता।”
सोशल मीडिया पर उठी मांग – ‘बस ऑपरेटर गिरफ्तार हों’
जैसे ही यह खबर फैली, ट्विटर (अब X) और फेसबुक पर लोगों ने बस ऑपरेटरों और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए गिरफ्तारी की मांग शुरू कर दी। कई यूजर्स ने लिखा कि सिर्फ मुआवजा देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं
हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है, लेकिन सवाल उठता है –क्या कुछ हजार रुपये का मुआवजा उन यात्रियों के दर्द को कम कर सकता है जो जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं? विशेषज्ञ मानते हैं कि मुआवजे से ज्यादा जरूरी है कि ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिले।



