कचौरी में दही की तरह है अजमेर कांग्रेस की गुटबाजी: नेता गुट बदलना नहीं भूलते! 😂 Newstarana.com

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कचौरी में दही की तरह है अजमेर कांग्रेस की गुटबाजी: नेता गुट बदलना नहीं भूलते! 😂

कांग्रेस की घटती दूरियाँ या बढ़ती चालाकियाँ? 🤔🤣

 

अजमेर की सियासत का मौसम बड़ा रंगीन है साहब! 🌦️

यहाँ बादल भी अचानक बदल जाते हैं और कांग्रेस के समीकरण भी।

आज जो साथ है, वो कल विपक्ष में मिल सकता है,

और जो नाराज़ है, वो कल मंच पर फूल लेकर स्वागत करता दिखे —

यही है अजमेर कांग्रेस की राजनीति की सबसे बड़ी खूबी! 😄

 

 

🌹 गुटबाजी का गौरवशाली इतिहास

 

अजमेर की कांग्रेस का इतिहास अगर कोई फिल्म बने तो उसका नाम होगा —

“कभी गहलोत, कभी पायलट — और बीच में बेचारा संगठन!” 🎬

 

सालों से यहाँ दो ही ध्रुव हैं —

एक तरफ गहलोत गुट के परंपरागत महारथी,

दूसरी ओर पायलट सेना के उत्साही योद्धा।

बीच में आते हैं शहर कांग्रेस के अध्यक्ष,

जो हर बार ये सोचते हैं कि अब एकता आएगी,

मगर हकीकत में आते हैं सिर्फ़ नए-नए फ्रेम वाले ग्रुप फोटो! 📸😂

 

 

 

🏇 हालिया एपिसोड – पायलट का अजमेर मिशन

 

अब हाल ही में जब सचिन पायलट साहब का काफिला अजमेर पहुँचा,

तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ी पड़ी

 

शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन के नेतृत्व में पूरा स्वागत ऐसा हुआ

मानो अजमेर में कांग्रेस फिर से जन्म ले रही हो। पूर्व मंत्री नसीम अख्तर पूर्व विधायक राकेश पारीक महेंद्र सिंह रलावता आदि सभी पायलट गुट के सिपहसालार पूरे दल के साथ आए 

लेकिन असली खबर यह थी कि

राठौड़ गुट के कई नेता, जो कल तक

“हम तो पायलट से दूर ही अच्छे हैं” की शपथ खा चुके थे,

वो भी फूल-मालाएँ लेकर लाइन में लगे दिखे। 🌺

 

शैलेन्द्र अग्रवाल, वाहिद मोहम्मद, नौरत गुर्जर, हरी सिंह गुर्जर एडवोकेट जैसे चेहरे

जो कल तक “हमारे गुट का अपना स्टाइल है” कहते थे,

अब पायलट के स्वागत में सेल्फी मोड ऑन किए खड़े थे। 🤳

अब इसे आप “एकता” कहिए या “एंट्री पास पक्का करना”,

राजनीतिक विश्लेषक तो मुस्कुरा कर कह रहे हैं —

“कांग्रेस में कोई स्थायी दुश्मन नहीं, बस मौसमी असहमति है!” 🌤️

 

 

—

 

🏛️ बदलते समीकरण या बदलते हावभाव?

 

राजनीति के जानकार कहते हैं —

“कांग्रेस में आज जो एक-दूसरे को गले लगा रहे हैं,

कल फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक-दूसरे की शिकायत भी कर सकते हैं।” 😜

 

अजमेर में गुटबाजी कोई आज की बात नहीं।

यह तो वंश परंपरा है —

जिस तरह यहाँ के लोग कचौरी में दही डालना नहीं भूलते,

उसी तरह नेता गुट बदलना नहीं भूलते।

 

आज “समन्वय” का दौर चल रहा है,

पर कांग्रेस के पुराने जानकार जानते हैं —

यहां एकता का मतलब है “थोड़े दिन की शांति और फिर वही राजनीति”!

मतलब जैसे अजमेर का मौसम —

सुबह धूप, दोपहर को बरसात और शाम को फिर धुआंधार बहस! 🌦️🔥

 

 

 

😂 कांग्रेस की अजमेरी यूनिकॉर्न पार्टी

 

अगर कांग्रेस के गुटों पर नज़र डालें तो लगता है

जैसे हर ब्लॉक में एक “मिनी कांग्रेस” खुली हुई है —

हर एक का अपना अध्यक्ष, अपना पोस्टर और अपना व्हाट्सऐप ग्रुप! 📱

और जब ऊपर से हाईकमान कोई आदेश भेजता है,

तो सबका पहला सवाल होता है —

“कौन से गुट के लिए है?” 😆

 

राठौड़ खेमे के एक सीनियर नेता ने तो मज़ाक में कहा —

“हम कांग्रेस में हैं, लेकिन दिल अभी भी विपक्ष में है।”

दूसरे ने हँसते हुए जवाब दिया —

“भाई, अजमेर में कांग्रेस का विपक्ष कांग्रेस ही है!” 😂

 

 

🪶 अब बदलते संकेत या सिर्फ दिखावटी संतुलन?

 

पायलट के स्वागत में गहलोत गुट के नेता शामिल हुए,

यह जरूर एक नया संदेश देता है —

पर पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को यह दृश्य अदभुत जैसा लगा।

क्योंकि अजमेर में यह पहली बार नहीं हो रहा —

हर चुनाव से पहले यहाँ गुटबाजी की दीवारें गिरती हैं,

और परिणाम आते ही फिर ईंटें इकट्ठी हो जाती हैं! 🧱

 

कहते हैं अजमेर कांग्रेस में एक अनोखी प्रतिभा है —

यहाँ सहमति भी रणनीति होती है और मौन भी विरोध का संकेत!

मतलब अगर कोई नेता किसी कार्यक्रम में नहीं आया,

तो उसके कारण पर पाँच दिन तक चर्चा चलती रहती है।

यहाँ “अनुपस्थिति” भी “राजनीतिक उपस्थिति” मानी जाती है! 🤫

 

 

🧩 भविष्य की तस्वीर – ‘विरोध’ से ‘समन्वय’ या ‘कन्फ्यूजन’?

 

अगर राजनीतिक संकेतों को पढ़ें तो यह सही है कि

अजमेर कांग्रेस अब विरोध से समन्वय की ओर बढ़ने की कोशिश में है।

पर असली सवाल है —

क्या यह “समन्वय” सच में दिलों का है या

बस फोटो फ्रेम के कोनों तक सीमित है? 🖼️

 

क्योंकि अजमेर की कांग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड कहता है —

यहाँ कब कौन किसके साथ हो जाए, यह मौसम विभाग भी नहीं बता सकता! ☁️

 

 

🪙 निष्कर्ष — कांग्रेस का अजमेरी संस्करण

 

कांग्रेस की यह कहानी हमें सिखाती है कि

राजनीति में स्थायी कुछ नहीं होता —

न विरोध, न समर्थन।

यहाँ सब कुछ इवेंट-बेस्ड लॉयल्टी सिस्टम पर चलता है। 😎

 

तो अजमेर की कांग्रेस आज “एकता” के सुर गा रही है,

पर पुराने कार्यकर्ता मुस्कुराकर कह रहे हैं —

“भाई, थोड़ा ठहरो… ये कांग्रेस है, चमत्कार कभी भी हो सकता है!” 😂

 

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