Pushkar fair : आस्था और रोमांच का अद्भुत संगम! 4 लाख श्रद्धालुओं ने किया पंचतीर्थ स्नान; IPS-ASP ने खेला कैम्ल पोलो, पहली बार हुआ हॉर्स शो
अजमेर/पुष्कर: विश्वविख्यात अंतर्राष्ट्रीय पुष्कर मेला 2025 (Pushkar Mela 2025) इस वर्ष आस्था, संस्कृति और रोमांच का एक अद्भुत केंद्र बनकर उभरा है। धार्मिक पंचतीर्थ स्नान के लिए जहाँ लाखों श्रद्धालु उमड़े, वहीं खेल और सांस्कृतिक आयोजनों ने मेले को एक नया आयाम दिया।
🙏🏻 आस्था का महासागर: 4 लाख श्रद्धालुओं ने किया पंचतीर्थ स्नान
मेले के धार्मिक पक्ष में इस साल भारी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। कार्तिक पंचतीर्थ स्नान के दौरान चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र पुष्कर सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई।
पुण्य की डुबकी: देवउठनी प्रबोधिनी एकादशी से शुरू हुआ यह पंचतीर्थ स्नान कार्तिक पूर्णिमा के महास्नान के साथ संपन्न हुआ।
धार्मिक महत्व: ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुष्कर सरोवर में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
🌟 रोमांच का तड़का: IPS-ASP ने खेला कैम्ल पोलो और पहली बार हॉर्स शो
मेले के सांस्कृतिक और खेलकूद के कार्यक्रमों में इस साल कुछ अविस्मरणीय नज़ारे देखने को मिले, जिसने स्थानीय लोगों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया।
कैम्ल पोलो में दिखा अधिकारियों का जोश: मेले के मुख्य आकर्षणों में से एक, कैम्ल पोलो (Camel Polo) के मुकाबले में पहली बार प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। IPS और ASP रैंक के अधिकारियों की टीमों के बीच हुए इस रोमांचक मैच को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक उमड़े। रेगिस्तानी जहाज कहे जाने वाले ऊंटों पर सवार होकर इन अधिकारियों ने जिस तरह पोलो खेला, वह काबिले तारीफ था।
पहली बार हॉर्स शो (Horse Show): इस साल मेले में पहली बार भव्य हॉर्स शो का आयोजन किया गया। सजे-धजे बेहतरीन नस्ल के घोड़ों ने अपनी कला और फुर्ती का शानदार प्रदर्शन किया। घोड़ों के नृत्य और परेड ने मेले की शोभा को कई गुना बढ़ा दिया।
कच्ची घोड़ी डांस और फायर शो: राजस्थान की समृद्ध लोक कला का प्रदर्शन करते हुए प्रसिद्ध कच्ची घोड़ी डांस कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। इस डांस के साथ फायर शो (Fire Show) का रोमांचक संयोजन दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव रहा।
🎨 संस्कृति और परंपरा का संगम
पशु व्यापार के साथ-साथ, पुष्कर मेला हमेशा से ही राजस्थानी संस्कृति का जीवंत उत्सव रहा है। लोक संगीत, कालबेलिया नृत्य, मटका दौड़ और पगड़ी बांधने जैसी प्रतियोगिताओं ने मेले में चार चांद लगा दिए। यह अंतर्राष्ट्रीय मेला एक बार फिर साबित करता है कि यह केवल पशुओं का मेला नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिकता, लोककला और परंपरा का एक बेमिसाल संगम है।



