“600 मिसाइलें भी नाकाम! जहाँ बड़े देश चूके, वहाँ मोदी के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को दिखाया असली ‘आयरन डोम’।” Newstarana.com

Yogita Mehra
6 Min Read

“600 मिसाइलें भी नाकाम! जहाँ बड़े देश चूके, वहाँ मोदी के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को दिखाया असली ‘आयरन डोम’।”

भारत का अभेद्य कवच: आधुनिक युद्धकला में मोदी सरकार का ‘ग्लोबल डिफेंस मास्टरक्लास’

​आज की दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है। पश्चिम एशिया से लेकर यूरोप के मुहाने तक, हमने देखा है कि कैसे अत्याधुनिक तकनीक से लैस देश भी ड्रोन और मिसाइल हमलों के सामने बेबस नजर आए। जब आसमान से आग बरसती है, तो विकसित देशों का डिफेंस सिस्टम भी कभी-कभी ‘सैचुरेशन पॉइंट’ (संतृप्ति बिंदु) पर आकर जवाब दे देता है। लेकिन इसी वैश्विक उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी सैन्य रणनीति और ‘आत्मनिर्भर’ शक्ति से दुनिया को वह कर दिखाया है, जिसे आज रक्षा विशेषज्ञ एक ‘डिफेंस मास्टरक्लास’ मान रहे हैं।

​1. बदलते युद्ध का नया चेहरा: ड्रोन और मिसाइल वॉरफेयर

​आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन पर आमने-सामने की लड़ाई नहीं रह गया है। यह अब ‘बटन वॉर’ और ‘लॉन्ग रेंज स्ट्राइक’ का दौर है। हमने हालिया वैश्विक संघर्षों में देखा कि कैसे सस्ते ‘कामिकाज़ी ड्रोन’ करोड़ों डॉलर के एयर डिफेंस सिस्टम को छका देते हैं। ऐसे में भारत के सामने चुनौती दोहरी थी—एक तरफ लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और दूसरी तरफ झुंड में आने वाले (Swarm) ड्रोन्स।

​2. S-400: भारत का ‘सुदर्शन चक्र’

​भारत की सुरक्षा दीवार का सबसे मजबूत स्तंभ S-400 ट्रायम्फ है। इसे दुनिया का सबसे घातक एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है।

​क्षमता: यह एक साथ 36 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और 400 किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और यहाँ तक कि स्टील्थ फाइटर्स को नष्ट करने की क्षमता रखता है।

​रणनीतिक बढ़त: मोदी सरकार ने वैश्विक दबावों के बावजूद इस सौदे को पूरा किया, जिसने भारत को एक ऐसी ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ क्षमता दी है, जिससे दुश्मन के 600 तो क्या, हजारों मिसाइलें भी भारत की सीमा में दाखिल होने से पहले कबाड़ में तब्दील हो सकती हैं।

​3. ‘आकाश’ और ‘मेक इन इंडिया’ का स्वदेशी दम

​S-400 अगर दूर की कौड़ी है, तो आकाश (Akash) मिसाइल सिस्टम भारत का वह स्वदेशी रक्षक है जिसने हाल ही में एक रिकॉर्ड बनाया है। ‘अस्त्रशक्ति’ अभ्यास के दौरान भारत ने दिखाया कि कैसे एक ही ‘आकाश’ यूनिट एक साथ चार लक्ष्यों को सटीकता से भेद सकती है।

​स्वदेशी ताकत: यह पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ का परिणाम है।

​लागत और मारक क्षमता: जहाँ पश्चिमी सिस्टम बेहद महंगे हैं, वहीं आकाश सिस्टम कम लागत में 90% से ज्यादा की सटीकता (Kill Probability) प्रदान करता है। यह ड्रोन्स के झुंड को बेअसर करने के लिए भारत का अचूक हथियार है।

​4. ऑपरेशनल डोमिनेशन: दहशत नहीं, सिर्फ आत्मविश्वास

​जब दुश्मन की ओर से बड़े पैमाने पर हमले की साजिश रची जाती है, तो उसका मुख्य उद्देश्य ‘दहशत’ फैलाना होता है। लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की रणनीति ‘रिएक्टिव’ (प्रतिक्रियावादी) होने के बजाय ‘प्रोएक्टिव’ (अग्रसक्रीय) हो गई है।

​सर्जिकल स्ट्राइक का संदेश: भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हम सिर्फ अपनी सीमा पर रक्षा नहीं करेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के घर में घुसकर खतरे को खत्म करेंगे।

​शून्य क्षति की रणनीति: आधुनिक ‘आयरन डोम’ जैसी तकनीक और रडार नेटवर्किंग (IACCS) ने भारत के महानगरों और सैन्य अड्डों को एक अभेद्य किले में बदल दिया है।

​5. वैश्विक नेतृत्व और रणनीतिक स्वायत्तता

​आज दुनिया देख रही है कि भारत किसी एक गुट का हिस्सा नहीं है। हम रूस से S-400 लेते हैं, तो अमेरिका के साथ ‘प्रिडेटर ड्रोन्स’ की डील करते हैं और साथ ही अपनी ‘पिनाका’ और ‘ब्रह्मोस’ मिसाइलों को दुनिया को निर्यात भी कर रहे हैं। यह ‘एब्सोल्यूट डोमिनेशन’ की स्थिति है।

​”भारत अब वह देश नहीं है जो हमलों के बाद दुनिया की ओर देखता था। आज का भारत वह है, जिसकी सुरक्षा दीवार के पीछे 140 करोड़ लोग चैन की नींद सोते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि सीमा पर तैनात तकनीक और नेतृत्व दोनों अभेद्य हैं।”

​भविष्य का भारत

​यदि कभी दुश्मन ने 600 या उससे अधिक मिसाइलों से भारत को दहलाने की कोशिश की, तो उसे जवाब में केवल ‘हवा में जलता हुआ मलबा’ ही नसीब होगा। यह मोदी सरकार के ‘विजन 2030’ का हिस्सा है, जहाँ भारत न केवल अपनी रक्षा करेगा, बल्कि दुनिया के लिए ‘डिफेंस हब’ बनकर उभरेगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी परिकल्पनाएं इसी आत्मविश्वास का प्रतीक हैं कि भारत अब किसी भी चुनौती को ‘मास्टरक्लास’ तरीके से बेअसर करने का माद्दा रखता है।

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