पेपर लीक की ‘परिभाषा’ पर घिरी NTA: संसदीय समिति ने उठाए तीखे सवाल; ‘गेस पेपर’ वाले दावे पर दी 10 जून तक जवाब देने की मोहलत bynewstarana.com

Yogita Mehra
8 Min Read

पेपर लीक की ‘परिभाषा’ पर घिरी NTA: संसदीय समिति ने उठाए तीखे सवाल; ‘गेस पेपर’ वाले दावे पर दी 10 जून तक जवाब देने की मोहलत

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली देश की सबसे प्रतिष्ठित और बड़ी परीक्षाओं में शुमार नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 को लेकर उपजा विवाद अब संसद की दहलीज तक पहुंच चुका है। लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों और मई 2026 में परीक्षा रद्द होने के बाद इस पूरे मामले की जांच कर रही संसद की स्थायी समिति ने NTA की कार्यप्रणाली पर बेहद कड़े सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली ‘शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति’ के सामने NTA ने जो दलीलें दीं, उसने मामले को सुलझाने के बजाय और उलझा दिया है।

संसदीय समिति के सामने सबसे बड़ा विवाद ‘पेपर लीक की परिभाषा’ को लेकर खड़ा हो गया है, जिसने देश के लाखों छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को हैरान कर दिया है। आइए इस पूरे घटनाक्रम और संसदीय समिति द्वारा उठाए गए तीखे सवालों को विस्तार से समझते हैं।

1. ‘गैस पेपर’ बनाम ‘पेपर लीक’: NTA का अजीब दावा

संसदीय समिति के समक्ष पेश हुए NTA के शीर्ष अधिकारियों और महानिदेशक (DG) ने एक ऐसी दलील दी, जिसने समिति के सदस्यों को नाराज कर दिया। NTA के अधिकारियों ने दावा किया कि:

“NTA के मुख्य सिस्टम या डेटाबेस से कोई पेपर लीक नहीं हुआ था। परीक्षा से पहले जो सामग्री बाजार या सोशल मीडिया पर घूम रही थी, वह दरअसल कुछ ‘गेस पेपर्स’ (संभावित प्रश्न पत्र) थे, जिनके कुछ सवाल इत्तेफाक से असली परीक्षा से मेल खा गए। इसे तकनीकी रूप से ‘पेपर लीक’ नहीं कहा जा सकता।”

NTA के इसी रक्षात्मक रवैए पर संसदीय समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति का मानना है कि जब परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र या उसके महत्वपूर्ण हिस्से हूबहू बाहर आ जाते हैं, तो उसे ‘गेस पेपर’ कहकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता।

2. संसदीय समिति के कड़े सवाल और प्रश्नावली

NTA के दावों को सिरे से खारिज करते हुए दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाले पैनल ने एजेंसी को घेरते हुए एक विस्तृत प्रश्नावली थमाई है और 10 जून 2026 तक लिखित जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है। समिति के मुख्य सवाल निम्नलिखित हैं:

‘पेपर लीक’ की आधिकारिक परिभाषा क्या है? समिति ने NTA से साफ शब्दों में पूछा है कि उनके शब्दकोश और नियमों के मुताबिक ‘पेपर लीक’ की सटीक परिभाषा क्या है? एजेंसी किस सीमा तक हुई गड़बड़ी को लीक मानती है?

2018 से अब तक कितने लीक हुए? साल 2017 में NTA के गठन के बाद से (विशेषकर 2018 से) अब तक आयोजित कराई गई परीक्षाओं में कितनी बार इस तरह की घटनाएं हुई हैं, इसका पूरा ब्यौरा मांगा गया है।

CBI के अलावा अपनी आंतरिक जांच क्यों नहीं की? समिति ने पूछा कि NEET-UG में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगने के बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के समानांतर NTA ने अपनी कोई स्वतंत्र आंतरिक जांच क्यों नहीं बैठाई?

कर्मचारियों और भर्तियों का ब्यौरा: पिछले तीन वर्षों में NTA में कुल कितने कर्मचारी कार्यरत रहे हैं, 2022 के बाद कितनी नई भर्तियां हुई हैं और उच्च शिक्षा विभाग को भेजी गई वार्षिक रिपोर्टों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया गया है।

3. राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों पर जवाब तलब

जून 2024 में नीट विवाद के बाद केंद्र सरकार ने इसरो (ISRO) के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी का उद्देश्य NTA के ढांचे में सुधार, डेटा सुरक्षा और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के लिए सुझाव देना था।

NTA ने संसदीय समिति को बताया कि डॉ. राधाकृष्णन कमेटी की 101 सिफारिशों में से लगभग 70 से 75 प्रतिशत अल्पकालिक (Short-term) सुधारों को लागू कर दिया गया है। हालांकि, संसदीय समिति ने इस मौखिक दावे को पर्याप्त नहीं माना। समिति ने NTA से इन सभी 101 सिफारिशों में से प्रत्येक पर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (Action Taken Report) मांगी है कि वास्तव में जमीन पर क्या बदलाव किए गए हैं।

4. ‘सोसाइटी’ बनाम ‘संवैधानिक संस्था’ का कानूनी पेंच

विशेषज्ञों और संसदीय समिति के बीच इस बात पर भी गंभीर चर्चा चल रही है कि NTA के बुनियादी ढांचे में ही बड़ी खामी है।

कानूनी हैसियत: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तरह NTA कोई संवैधानिक या वैधानिक (Statutory) संस्था नहीं है, बल्कि यह सोशायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत एक स्वायत्त सोसाइटी है।

जवाबदेही की कमी: इस कानूनी स्थिति के कारण संकट के समय इसकी सीधे तौर पर संप्रभु जवाबदेही (Sovereign Accountability) तय करने में दिक्कतें आती हैं।

स्थायी कैडर का न होना: NTA के पास अपना कोई स्थायी प्रशासनिक कैडर नहीं है। यह एजेंसी प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आए अधिकारियों और संविदा (Contractual) कर्मचारियों के भरोसे चलती है। ऐसे में परीक्षाओं की गोपनीयता का दीर्घकालिक तंत्र विकसित करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

5. डिजिटल परीक्षा (CBT Mode) की तरफ कदम

लगातार लीक हो रहे पेपर और पेन-एंड-पेपर (ओएमआर शीट) मोड में आ रही सुरक्षा कमियों को देखते हुए अब शिक्षा मंत्रालय और NTA नीट परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT Mode) में स्थानांतरित करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। संसदीय समिति ने इस बदलाव को लेकर भी सवाल किए कि क्या देश के पास इतने बड़े पैमाने पर (22 लाख से अधिक छात्रों के लिए) पारदर्शी डिजिटल परीक्षा आयोजित कराने का पर्याप्त बुनियादी ढांचा मौजूद है?

निष्कर्ष: साख और छात्रों के भविष्य का सवाल

“यह केवल शब्दों का खेल या परिभाषा की लड़ाई नहीं है; यह देश के 22 लाख से अधिक उन युवाओं के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है, जो दिन-रात एक करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।”

संसदीय समिति की इस सख्त खिंचाई और कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ‘तकनीकी शब्दावलियों’ के पीछे छिपकर जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता। NTA को 10 जून तक संसद के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। फिलहाल, प्रभावित छात्रों के लिए राहत की बात यह है कि रद्द हुई NEET-UG 2026 की परीक्षा आगामी 21 जून 2026 को दोबारा (Retest) आयोजित होने जा रही है, जिसकी निगरानी खुद केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि NTA इस बार अपनी खोई हुई साख को वापस पा सकती है या नहीं।

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